पड़ोसन चाची को उधार के बदले

 दोस्तो, मेरा नाम रफीक है. मैं एक गांव में रहता हूँ.


यह देसी चाची सेमक्ष कहानी उन दिनों की है, जब मेरी उम्र 19 साल की थी.

मेरे पापा एक व्यापारी हैं. उनके अच्छे व्यापार के चलते हमें कभी भी पैसों की कमी नहीं हुई.


मैं शुरू से ही सेमक्ष का दीवाना था.


मेरे पड़ोस में एक चाची रहती थीं, उनकी उम्र करीब 35 साल की रही होगी.

चाचीजान की हाइट 5 फुट 2 इंच की थी. वे देखने में ठीक-ठाक माल थीं.

उनकी गांवड और चूचियां भरी हुई थीं. कुल मिलाकर चाची का फिगर मस्त था.


वे कभी कभी हमारे घर में आती रहती थीं और मुझसे काफ़ी बातें किया करती थीं.


उनसे बात करते समय मैं उनकी चूचियों को निहारता रहता था और मेरे मन में बस यही चलता कि काश एक बार चाची को चोदने का मौका मिल जाए.


एक दिन की बात है, चाची को कुछ पैसों की ज़रूरत थी तो वह पैसे उधार लेने के लिए हमारे घर आई थीं.

मेरी मम्मी ने उन्हें पैसे देने से मना कर दिया.


मैं उन दोनों की सब बातें सुन रहा था.


चाची को पैसों की सख्त ज़रूरत थी, उनका पति कुछ काम नहीं करता था. उनको सट्टा खेलने की बुरी आदत भी थी.


मैंने चाची की बात सुन कर सोचा कि क्यों ना मैं ही इन्हें पैसे दे दूँ और मौका मिला तो इन्हें सैट भी कर लूँगा.


यही सब सोच कर मैंने चाची के बाहर निकलते ही उन्हें एक तरफ ले जाकर कहा- आप मुझसे पैसे ले लो, जब आपके पास हो जाएं … तब वापस दे देना, पर यह बात मेरे घर वालों को पता नहीं चलनी चाहिए!


अब चाची तो पैसे के लिए परेशान थी हीं, उन्होंने झट से हां बोल दी.


मैंने उनको पैसे दे दिए.

चाची ने मेरे तरफ खुश होकर देखा और बोलीं- मालिक तुम्हें खूब तरक्की दे.

वे यह कह कर अपनी गांवड मटकाती हुई चली गईं.


उन्होंने पैसे लेने के बाद मेरे घर आना ही बंद कर दिया.

कुछ तो मेरी अम्मी ने भी उनसे बात करना कम कर दी थी कि कहीं ये फिर से पैसे मांगने की बात न करने लगें.


दूसरी तरफ चाची को मेरे पैसे वापस करने थे तो वे अब मुझे भी नहीं देखना चाहती थीं कि कहीं मैं उनसे पैसे वापस मांगने की बात न करने लगूँ.


इस तरह से काफ़ी दिन हो गए.


उन्होंने पैसे वापस ही नहीं किए.

मैंने भी उनसे पैसे नहीं माँगे.


फिर एक दिन पापा और मम्मी को कोई काम आ गया और वे दोनों मेरे ननिहाल चले गए.

वे दोनों दो दिन के लिए गए थे.


उस दिन मैं उनके साथ नहीं गया था क्योंकि मुझे मन में ख्याल आया कि आज मैं चाची को बुला कर सेमक्ष का बोल ही दूँगा.

जैसे ही मेरे मम्मी पापा गए, मैं चाची के घर के बाहर ही जाकर बैठ गया.


मैं सोचने लगा कि इनको कैसे चोदूं?


कुछ देर बाद मैं उनके घर में चला गया.

वे सामने ही दिख गईं.


मुझे देख कर उनके चेहरे पर कुछ घबराहट के से भाव आ गए थे कि मैं उनसे पैसे की बात करने आ गया हूँ.


उन्होंने मुझे बैठने के लिए कहा.

मैं चाची से बातें करने लगा- और सुनाओ चाची आप कैसी हैं?


वे कहने लगीं- अब क्या सुनाऊं बेटा. बस अपनी बदनसीबी के दिन काट रही हूँ.

मैंने उनके चूचे देखते हुए कहा- अरे सब ठीक हो जाएगा चाची … चिंता मत किया करो.


उन्होंने मेरी नजरों को ताड़ लिया और कहा- मुझे तो अभी तुम्हारे भी पैसे देने बाकी हैं.

इस पर मैंने कहा- अरे कोई बात नहीं, दे देना.


वे बोलीं- हां, पैसों को भी लिए हुए काफी दिन हो गए हैं.

मैंने कहा- कोई बात नहीं … पैसे नहीं भी देना है, तो मत दो. पर आपको मेरा एक काम करना है.


वे पैसे माफ होने की खुशी को दबाती हुई बोलीं- क्या काम?

मैंने कहा- चाची, आज घर में कोई नहीं है और मुझे आप बहुत पसंद हो, तो क्या आप मेरे घर आ सकती हो?


उन्होंने पहले तो मुझको देखा, उनकी नजरों से मैं डर सा गया कि साला रायता न फैल जाए.

फिर चाची ने एक पल सोचने के बाद हां बोल दी.


पर उन्होंने कहा- अभी सब लोग वापस आने वाले भी हैं. मैं कल सुबह जल्दी आ जाऊंगी.

मैंने भी ज़्यादा फोर्स नहीं किया और घर आ गया.


उसके बाद मैंने अपने एक फ्रेंड के घर जाकर खाना खा लिया और घर वापस आ गया.

रात हो गई थी तो बस चाची के बारे में सोच सोच कर लमण्ड सहलाने लगा, लमण्ड कड़क हो गया तो मुठ मार कर सो गया.


जब सुबह हुई, तो मैं उठ कर फ्रेश हुआ और चाय बनाकर पीने लगा.

तभी वे मेरे घर आ गईं.


चाची जैसे ही मेरे घर में आईं, मैंने चाय का कप एक तरफ रखा और चाची को कामुक नजरों से देखते हुए पकड़ कर सोफ़े की तरफ किया और उनसे बैठने का इशारा किया.


वे मुझे देखती हुई सोफ़े पर बैठ गईं और मैंने दरवाजा बंद कर दिया.


चाची मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगीं. मैं उन्हें बांहों में लेकर चूमने लगा.

वे भी कुछ नहीं बोलीं बस मेरे होंठों से चुंबन का मजा लेने लगीं.


मैंने दस मिनट तक उसके होंठों को चूसा.


फिर उन्होंने कहा- कोई आ न ज़ाए?

मैंने कहा- कोई नहीं आएगा. मैंने दोनों तरफ़ से दरवाजे बंद कर दिए हैं.


अब मैंने चाची को लिटाया और उनके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.

वे भी धीरे धीरे गर्म होना चालू हो गईं.


मैंने उनकी साड़ी के अन्दर हाथ डाल दिया और जांघों के सहलाते हुए मैं उनकी चूवती तक आ गया.


चाची ने चड्डी पहनी ही नहीं थी.

शायद वे चुदवाने का मूड बना कर ही आई थीं.


चूवती एकदम सफाचट थी.


मैंने उनकी चूवती में उंगली डाली तो मेरी उंगली बड़े आराम से चाची की चूवती में सरकती चली गई.


चूवती में रस भरा पड़ा था.

इसका मतलब साफ था कि चाची भी चुवदावई के पूरे मूड में आई थीं.


उनकी सफाचट चूवती से लग तो रहा था, पर गीली चूवती से ये भी साफ हो गया था कि वे खुद अपनी चूवती की सर्विसिंग करवाने की सोच कर आई थीं.


अब मैंने चाची की चूवती में दो उंगलियां डालीं, तो वे दोनों भी घुसती चली गईं, लेकिन थोड़ा कसावट के साथ गई थीं.


वह आह आह करने लगी थीं.

मैंने पूछा- क्या हुआ?


वे कहने लगीं कि अब उंगली से ही करते रहोगे क्या?

मैंने कहा- आपको लमण्ड से करवाने की जल्दी हो, तो लमण्ड से ही चुवदावई शुरू कर दूँ?


देसी चाची सेमक्ष की उतावली में बोलीं- हां, पहले एक बार जल्दी से अपने उससे ही कर दो. बाद में खेलते रहना.


मैंने समझ लिया कि चाची काम पिपासा से खुद ही सुलगी जा रही हैं. शायद चाचा का लमण्ड काम का नहीं है. ये सिर्फ मेरे पैसे चुकाने के लिए मुझसे चुदवाने नहीं आई हैं. इनको खुद ही लमण्ड की जरूरत है इसी लिए मेरे साथ बार बार चुदवाने के लिए भी राजी हैं.


अब मैंने अपना लमण्ड बाहर निकाला, तो वे लौड़े को अचरज से देखने लगीं.

मेरा लमण्ड 6 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है.


लमण्ड को देखते ही वे बुत सी बन कर रह गईं; उनका मुँह खुला का खुला ही रह गया था.

मैंने उनको धक्का देते हुए सीधा लिटाया और लमण्ड को उनकी चूवती पर रख दिया.


वे भी गर्म हो चुकी थीं और लमण्ड लीलने के लिए खुद से मरी जा रही थीं.

मैंने लौड़े को चूवती की फांक पर सैट किया और एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया.


लमण्ड अन्दर घुसा तो चाची की चीख निकल गई.

वह कराहती हुई कहने लगीं- आह मर गई … क्या फाड़ना है?


मैंने कहा- क्या चाचा ने आपको ठीक से चोवदा नहीं है?

उन्होंने मरी सी आवाज में कहा- चाचा का लमण्ड तुम्हारे लमण्ड से बहुत छोटा है. तुम्हारा लमण्ड बहुत मोटा भी है. जब भी तुम्हारे चाचा चोदते हैं, तो 5 ही मिनट में उसका पानी निकल जाता है.


मैंने चाची की ये बात सुनी तो कहा- चाची चलो आज आपको जन्नत की सैर करवाता हूँ.

यह कह कर मैंने चाची की चूवती से लमण्ड बाहर निकाला और अपना मुँह उनकी चूवती पर रख दिया.


मेरी जीभ चाची की चूवती का स्पर्श मचलने लगी और मैं उनकी चूवती चाटने लगा.


वे कामुक सिसकारियां लेने लगीं.

उनकी हालत खराब होने लगी.


चाची ने कराहते हुए कहा- बस कर … अब लमण्ड अन्दर डाल दे … नहीं रहा जा रहा. मेरी चूवती को फाड़ दे.

मैं भी जोश में आ गया और मैंने अपना मुँह चूवती से बाहर निकाला और लमण्ड को चूवती पर रख कर एक ज़ोरदार धक्का दे मारा.


मेरा लमण्ड उनकी चूवती को फाड़ता हुआ सीधा अन्दर चला गया.

चाची ज़ोर से चीखने लगीं- उई मर गई.


मैंने उनके होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया और जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा.

फिर मैंने उनकी चूवती में बहुत देर तक झटके मारे. अब वे भी गर्म हो गई थीं.


उनकी चुदास भड़क गई थी और अब वे भी मेरा साथ देने लगी थीं.

करीब 15 मिनट बाद चाची झड़ गईं और निढाल हो गईं.


मैं लगा रहा तो चाची मुझे मना करने लगीं कि अब मत करो.


मैंने कहा- मेरा पानी नहीं निकलेगा, तब तक कैसे रुक सकता हूँ?


चाची कहने लगीं कि तुम्हारा पानी कब निकलेगा?

मैंने कहा- वह ऐसे नहीं आएगा, आप एक काम करो, घोड़ी बन जाओ. मुझे आपकी गांवड मारनी है.


इस पर उन्होंने कहा- गांवड मरवाने में मुझे मज़ा नहीं आएगा. तुम मेरी चूवती ही मार लो … गांवड रहने दो.

पर मैंने उनकी एक भी बात नहीं सुनी और कहा कि बस एक बार कर लेने दो.


मेरे काफ़ी बोलने पर चाची मान गईं.

मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और तेल लेकर अपने लमण्ड पर लगाया और उनकी गांवड में घुसाने लगा.


चाची की गांवड बहुत टाइट थी.

मैं धीरे धीरे करके उनकी गांवड में लमण्ड घुसेड़ने लगा.


उन्हें बहुत तेज दर्द होने लगा पर मैंने कहा- बस थोड़ा सा दर्द होगा, फिर नहीं होगा.


मैं उनकी गांवड में लमण्ड पेलता रहा.

थोड़ी देर में मेरा पूरा लमण्ड चाची की गांवड में चला गया.

मैंने उनकी गांवड मारना चालू कर दी.


मैं जोश में आ गया और चाची की गांवड में तेज तेज झटके देने लगा.

वह ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगीं.


मैं उनकी आवाजों से और ज्यादा जोश में आ गया.

उन्होंने रोते हुए कहा- आज तक मुझे तेरे चाचा ने कभी ऐसे नहीं चोवदा.


फिर करीब 10 मिनट बाद मेरा भी पानी निकलने को हो गया.


मैं थोड़ी देर रुक गया और मेरा लमण्ड वापस रेडी हो गया.


मैंने चाची से कहा- अभी आप वापस से सीधी हो जाओ.


वे सीधी हुईं तो मैं चाची की चूवती चोदने लगा.

अब उनकी हालत बहुत खराब हो चुकी थी, वह आज से पहले कभी भी इतना ज्यादा नहीं चुदी थीं.


करीब 20 मिनट की चुवदावई के बाद मेरा पानी आने वाला था तो मैंने लमण्ड चूवती से निकाला और उनका मुँह खोल कर उसमें अपना पूरा पानी डाल दिया.

चाची भी मजे से सारा पानी पी गईं.


अब तक देसी चाची सेमक्ष से उनकी हालत काफी खराब हो गई थी, तो वे सीधी लेट गईं.


थोड़ी देर बाद मैं उठा और मैंने अपने कपड़े पहन लिए.

उनकी हालत काफी दिक्कत वाली हो गई थी, तो मैंने ही चाची को भी कपड़े पहनाए और दरवाजा खोल कर बाहर देखने गया कि बाहर कोई है तो नहीं.


जब देखा तो कोई नहीं था.

मैंने चाची से जाने का बोल दिया. चाची चली गईं.


इस घटना के बाद भी मैंने उनकी बहुत बार चुवदावई की और उन्हें भी मुझसे चुदवाना अच्छा लगता था.

मैंने कभी भी क़िसी को उनके बारे में नहीं बताया.